फर्जीवाड़ा मामले में पति-पत्नी को सश्रम कारावास की सजा
Published on 22 September 2026
नागपुर से समाचार — अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री मोहतेसिम बदर ने अपनी विशेष अदालत में विशेष प्रकरण क्रमांक 45/2024 में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए दो आरोपियों को सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। यह मामला अंबाझरी पुलिस थाने में दर्ज अपराध क्रमांक 64/2010 से संबंधित है, जो भारतीय दंड विधान की धारा 420 और 34 के तहत दर्ज किया गया था।
21 सितंबर 2026 को सुनाए गए फैसले में न्यायालय ने आरोपी मधुकर बानीराम देव्हारे (उम्र 46 वर्ष) तथा उनकी पत्नी श्रीमती सुनंदा मधुकर देव्हारे (उम्र 44 वर्ष), दोनों निवासी नागपुर, के विरुद्ध गवाहों और सबूतों के आधार पर अपराध साबित होने की पुष्टि की। न्यायालय ने दोनों आरोपियों को धारा 420, 34 भारतीय दंड विधान एवं धारा 248(2) दंड प्रक्रिया संहिता के अंतर्गत तीन माह के सश्रम कारावास तथा प्रत्येक पर पाँच हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड न भरने की स्थिति में दस दिन के अतिरिक्त कारावास का प्रावधान भी रखा गया है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, आरोपियों ने आपस में मिलीभगत कर बिडीपेठ स्थित अपने मकान के फर्जी दस्तावेज तैयार किए और उन्हें असली दिखाकर 'दि विदर्भ को-ऑपरेटिव सोसायटी' में गिरवी रखकर 3 लाख 25 हजार रुपये का गृह ऋण प्राप्त किया। इसके बाद 19 मार्च 2010 को दोपहर लगभग 3 बजकर 20 मिनट पर, जब यही मकान पहले से ही दूसरी संस्था के पास गिरवी था, आरोपियों ने उसी मकान के प्रमाणित दस्तावेज प्राप्त कर 'निर्मल उज्ज्वल सहकारी पतसंस्था' से 2 लाख 70 हजार रुपये और उधार लिए। इन दोनों रकमों की कोई भी वापसी न करते हुए आरोपियों ने संबंधित संस्थाओं के साथ विश्वासघात करते हुए आर्थिक धोखाधड़ी को अंजाम दिया।
इस मामले में शिकायत संस्था की प्रबंधक श्रीमती नंदा दिनेश बांते (उम्र 39 वर्ष) की शिकायत पर अंबाझरी पुलिस थाने में आरोपियों के विरुद्ध मामला दर्ज किया गया था। आरोपियों को 19 मार्च 2010 को गिरफ्तार किया गया था।
जांच पूरी होने के बाद तत्कालीन जांच अधिकारी ने न्यायालय में आरोपपत्र प्रस्तुत किया था। इस मामले में सरकारी अभियोजक के रूप में अधिवक्ता श्री आष्टणकर ने तथा आरोपियों की ओर से अधिवक्ता श्री करकरे ने पैरवी की। न्यायालयीन कार्यवाही में सहयोग हेतु कोर्ट पैरवी अधिकारी के रूप में महिला पुलिस हवलदार रंजना ने भूमिका निभाई।