प्रधानमंत्री का देश के नाम संदेश युवाओं को रोजगार और अर्थव्यवस्था में बड़े सुधारों का वादा
Published on 16 August 2025
नई दिल्ली: भारत के 79वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज 'विकसित भारत' के लिए एक व्यापक रोडमैप प्रस्तुत किया। अपने शक्तिशाली संबोधन में उन्होंने महत्वाकांक्षी नई योजनाओं, महत्वपूर्ण आर्थिक सुधारों, आत्मनिर्भरता पर ज़ोर और राष्ट्रीय सुरक्षा पर एक कड़े संदेश का मिश्रण पेश किया।
प्रधानमंत्री का यह भाषण, जो 'रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म' (सुधार, प्रदर्शन और परिवर्तन) के विषय पर केंद्रित था, देश के जीवन के विभिन्न पहलुओं को छू गया, जिसमें युवाओं को सशक्त बनाने से लेकर देश की रणनीतिक स्वायत्तता को मजबूत करना शामिल है।

यहाँ प्रधानमंत्री के भाषण की प्रमुख घोषणाओं और मुख्य बातों का बिंदुवार विवरण दिया गया है:
युवाओं और किसानों के लिए:
- प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना: रोजगार को बढ़ावा देने के लिए ₹1 लाख करोड़ की एक ऐतिहासिक योजना शुरू की गई। इसके तहत, निजी क्षेत्र में पहली नौकरी पाने वाले युवाओं को सरकार की ओर से ₹15,000 का वित्तीय प्रोत्साहन मिलेगा। इस पहल का लक्ष्य 3.5 करोड़ नए रोजगार के अवसर पैदा करना है।
- किसानों को दृढ़ समर्थन: प्रधानमंत्री ने सिंधु जल संधि पर एक स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि "रक्त और पानी एक साथ नहीं बह सकते" और जो पानी भारत का है, वह भारत के किसानों के लिए ही होगा। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि सरकार किसी भी प्रतिकूल अंतरराष्ट्रीय व्यापार नीति के खिलाफ भारतीय किसानों, मछुआरों और पशुपालकों के हितों की रक्षा के लिए एक "दीवार" के रूप में खड़ी रहेगी।
आर्थिक सुधार और आत्मनिर्भरता:
- अगली पीढ़ी के जीएसटी सुधार: एक बड़ी घोषणा करते हुए, प्रधानमंत्री ने देश को "दिवाली उपहार" के रूप में "अगली पीढ़ी के जीएसटी सुधारों" का वादा किया। इन सुधारों का उद्देश्य आम लोगों और छोटे व्यवसायों पर कर का बोझ काफी कम करना है।
- 'आत्मनिर्भर भारत' पर जोर: 'दाम कम, दम ज़्यादा' के मंत्र के साथ 'मेड इन इंडिया' उत्पादों के लिए एक मजबूत अपील की गई। प्रधानमंत्री ने घोषणा की कि पहली 'मेड इन इंडिया' सेमीकंडक्टर चिप्स इस साल के अंत तक उपलब्ध हो जाएंगी। उन्होंने स्वदेशी जेट इंजन विकसित करने के लिए युवाओं और वैज्ञानिकों को एक राष्ट्रीय चुनौती भी दी।
- अगली पीढ़ी के सुधारों के लिए टास्क फोर्स: अगली पीढ़ी के सुधारों को लाने के लिए एक समर्पित टास्क फोर्स का गठन किया जाएगा, जो नवाचार और आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए कानूनों को सरल बनाने और अनुपालन के बोझ को कम करने पर ध्यान केंद्रित करेगा।
- ऊर्जा आत्मनिर्भरता: ऊर्जा आयात पर निर्भरता कम करने के लिए, समुद्र के नीचे ऊर्जा संसाधनों का पता लगाने और उनका उपयोग करने के लिए एक "राष्ट्रीय गहरे पानी की खोज मिशन" या "समुद्र मंथन" शुरू किया जाएगा।
राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति:
- आतंकवाद पर कड़ा रुख: प्रधानमंत्री ने "ऑपरेशन सिंदूर" के लिए सशस्त्र बलों को सलाम किया और एक नया सामान्य स्थापित करने की बात कही, जहाँ भारत आतंकवाद या उसके समर्थकों को बर्दाश्त नहीं करेगा। उन्होंने एक कड़ा संदेश दिया कि भारत "परमाणु ब्लैकमेल" से डरने वाला नहीं है।
- उच्चाधिकार प्राप्त जनसांख्यिकी मिशन: जनसांख्यिकीय असंतुलन, विशेष रूप से सीमावर्ती क्षेत्रों में, की चुनौतियों से निपटने के लिए एक नया "उच्चाधिकार प्राप्त जनसांख्यिकी मिशन" स्थापित किया जाएगा, जिसे प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला बताया।
संस्कृति और विरासत:
- शास्त्रीय भाषाओं को मान्यता: प्रधानमंत्री ने मराठी, असमिया और बंगाली को उनकी समृद्ध साहित्यिक विरासत को पहचानते हुए शास्त्रीय भाषा का दर्जा देने की घोषणा की। पाली और प्राकृत को भी इस प्रतिष्ठित श्रेणी में शामिल किया गया है।
- आरएसएस की सराहना: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के 100 साल पूरे होने पर, प्रधानमंत्री ने राष्ट्र निर्माण के प्रति संगठन के समर्पण की प्रशंसा करते हुए इसे "दुनिया का सबसे बड़ा एनजीओ" कहा।
प्रधानमंत्री के भाषण ने देश के लिए एक स्पष्ट और महत्वाकांक्षी एजेंडा निर्धारित किया है, जिसमें आर्थिक विकास, युवा सशक्तिकरण और अटूट राष्ट्रीय सुरक्षा को 'विकसित भारत' के दृष्टिकोण की आधारशिला के रूप में रखा गया है।