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केरल की ननों की गिरफ्तारी पर ताज़ा अपडेट बेल, सच्चाई और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं

Published on 3 August 2025
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छत्तीसगढ़ में केरल की दो कैथोलिक ननों – सिस्टर प्रीथी मैरी और सिस्टर वंदना फ्रांसिस – की गिरफ्तारी ने राष्ट्रीय स्तर पर भारी विवाद खड़ा कर दिया था। दोनों पर मानव तस्करी और जबरन धर्मांतरण जैसे गंभीर आरोप लगाए गए थे, जिसके तहत उन्हें जून 2025 में गिरफ्तार किया गया था। हालाँकि, 2 अगस्त 2025 को छत्तीसगढ़ की NIA कोर्ट ने दोनों ननों और उनके साथ गिरफ्तार आदिवासी युवक सुखमन मंडावी को सशर्त जमानत दे दी। अदालत ने ₹50,000 का निजी मुचलका, पासपोर्ट जमा करने, दो स्थानीय गारंटर और देश छोड़ने पर पाबंदी जैसी शर्तें लगाईं।

अदालत ने स्पष्ट रूप से अपने आदेश में लिखा कि एफआईआर मुख्यतः संदेह और अनुमानों के आधार पर दर्ज की गई थी और आरोपियों का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि जिन आदिवासी लड़कियों को कथित तौर पर पीड़िता बताया गया था, उन्होंने बाद में पुलिस और मीडिया को दिए गए बयानों में दावा किया कि वे नौकरी की तलाश में स्वेच्छा से जा रही थीं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बजरंग दल और एक स्वयंसेवी संस्था के कार्यकर्ताओं ने उन पर दबाव डालकर झूठे बयान दिलवाए।

इस घटनाक्रम के बाद केरल में चर्च संगठनों और विपक्षी दलों ने कड़ा विरोध दर्ज किया। कांग्रेस नेता वी.डी. सतीसन ने इस मामले को भारत में ईसाई अल्पसंख्यकों के खिलाफ हो रहे 834 हमलों में से एक बताया और छत्तीसगढ़ सरकार पर धार्मिक स्वतंत्रता के उल्लंघन का आरोप लगाया। कैथोलिक बिशप्स काउंसिल ऑफ इंडिया (KCBI) के अध्यक्ष कार्डिनल बेसलियस क्लीमिस ने अदालत के फैसले पर भरोसा जताते हुए निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग की।

इस मामले ने धार्मिक स्वतंत्रता, आदिवासी अधिकारों और राजनीतिक ध्रुवीकरण जैसे मुद्दों को एक साथ उजागर किया है। ननों की जमानत के साथ भले ही एक अध्याय समाप्त हुआ हो, लेकिन यह मामला भारत में धर्म और मानवाधिकारों को लेकर गहराते संवाद का प्रतीक बन गया है।

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