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विश्व हेपेटाइटिस दिवस 2025 आइए इसे तोड़ें डॉ. संकेत मेहता ने जताई तत्काल कार्रवाई की ज़रूरत

Published on 29 July 2025
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World Hepatitis Day 2025 Let’s Break It Down — Dr Sanket Mehta Emphasizes the Urgent Need for Action

हर वर्ष 28 जुलाई को विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा विश्व हेपेटाइटिस दिवस मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य वायरल हेपेटाइटिस के प्रति जागरूकता फैलाना और समय पर जांच, इलाज व रोकथाम को बढ़ावा देना है। वर्ष 2025 की थीम “Hepatitis: Let’s Break It Down” यानी “हेपेटाइटिस: आइए इसे तोड़ें” इस बीमारी से जुड़ी हर बाधा को समाप्त करने की ओर एक स्पष्ट संदेश देती है। यह थीम दर्शाती है कि अब समय आ गया है जब हम कलंक, डर, महंगे इलाज और गलत धारणाओं की दीवारों को तोड़कर हेपेटाइटिस के खिलाफ ठोस कदम उठाएं। इस अवसर पर प्रसिद्ध गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल और हेपेटोबिलियरी सर्जन डॉ. संकेत मेहता, जो SSO कैंसर हॉस्पिटल के संस्थापक और निदेशक हैं, ने बीमारी की गंभीरता और इसके समाधान की तत्काल आवश्यकता पर विस्तार से चर्चा की। डॉ. मेहता के अनुसार, हेपेटाइटिस B और C अभी भी लिवर फेल्योर और लिवर कैंसर के प्रमुख कारण हैं, जबकि इनसे बचाव और इलाज दोनों ही संभव हैं। समस्या यह है कि रोग की पहचान अक्सर देर से होती है, जब तक लिवर को काफी नुकसान पहुंच चुका होता है। WHO के आंकड़ों के अनुसार, 2015 में वायरल हेपेटाइटिस के कारण 13.4 लाख लोगों की मृत्यु हुई थी, जो टीबी और एचआईवी से अधिक है। इन मौतों में से 96% हेपेटाइटिस B और C के कारण हुईं। वायरल हेपेटाइटिस के मुख्य पांच प्रकार होते हैं — A, B, C, D और E। इनमें A और E दूषित भोजन व पानी से फैलते हैं जबकि B और C संक्रमित रक्त, सुई या यौन संपर्क से फैलते हैं और गंभीर दीर्घकालिक संक्रमण का कारण बनते हैं। डॉ. मेहता का मानना है कि यह बीमारी जाति, धर्म, लिंग नहीं देखती, लेकिन स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता में भारी असमानता है। खासकर ग्रामीण और निम्न आय वर्ग के लोग जांच और इलाज से वंचित रह जाते हैं। भारत में हेपेटाइटिस B से संक्रमित लोगों की संख्या 4 करोड़ से अधिक है, वहीं C से करीब 61 लाख लोग प्रभावित हैं। फिर भी जागरूकता, समय पर जांच और इलाज की कड़ी अब भी कमजोर है। डॉ. मेहता ने इस बात पर बल दिया कि रूटीन जांच को सामान्य बनाना, इलाज की लागत को कम करना और गलत धारणाओं को दूर करना बेहद जरूरी है। साथ ही, समुदाय आधारित जागरूकता अभियान, स्कूल और कॉलेज स्तर पर शिक्षा, और स्वास्थ्यकर्मियों को संवेदनशील प्रशिक्षण देना आज की सबसे बड़ी जरूरत है। उनके अनुसार सरकार को टीकाकरण कार्यक्रमों का विस्तार करना चाहिए और एनजीओ, मीडिया व हेल्थ सेक्टर को मिलकर लोगों को सही जानकारी देनी चाहिए। डॉ. मेहता ने यह भी सुझाव दिया कि हेपेटाइटिस B के लिए अनिवार्य टीकाकरण और हेपेटाइटिस C के लिए सस्ती एंटीवायरल दवाएं हर ज़रूरतमंद तक पहुंचनी चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि इस लड़ाई में डॉक्टरों की भूमिका केवल इलाज तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि उन्हें मरीजों का मार्गदर्शन करने वाला साथी बनना होगा। डॉ. संकेत मेहता भारत के अग्रणी सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट हैं। उन्होंने HIPEC, Cytoreductive सर्जरी, PIPAC और लिवर कैंसर के इलाज में देश को नई दिशा दी है। वे भारत में पहली बार डेडिकेटेड HIPEC मशीन से सर्जरी करने वाले सर्जन हैं और अब तक देश में सबसे अधिक Cytoreductive सर्जरी कर चुके हैं। वे SSO Cancer Hospitals and Clinics के संस्थापक हैं, जहाँ सस्ती, विशेषज्ञ और उच्च गुणवत्ता की कैंसर देखभाल दी जाती है। इसके साथ ही उन्होंने Cancer Charity Trust की स्थापना की है, जिसके ज़रिए सैकड़ों ज़रूरतमंद मरीजों को सुलभ इलाज मिला है। 2025 का विश्व हेपेटाइटिस दिवस हमें यह याद दिलाता है कि बीमारी को खत्म करने के लिए केवल दवाइयों की नहीं, बल्कि समाजिक बदलाव की भी जरूरत है। “आइए इसे तोड़ें” केवल एक नारा नहीं, बल्कि एक रणनीति है — हमें कलंक, डर, महंगे इलाज और निष्क्रिय नीतियों की दीवारें तोड़नी होंगी। अगर हम मिलकर काम करें, तो 2030 तक दुनिया से हेपेटाइटिस को जड़ से खत्म करना कोई सपना नहीं, बल्कि हकीकत बन सकता है।

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