राजनीति में नई हलचल संजय राउत ने किया उद्धव-राज गठबंधन का ऐलान
Published on 16 August 2025
उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे ने आगामी नगर निगम चुनावों के लिए हाथ मिलाने का फैसला किया। शिवसेना (UBT) के नेता संजय राउत ने घोषणा की कि यह गठबंधन केवल मुंबई तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि ठाणे, पुणे, नासिक और औरंगाबाद जैसे प्रमुख शहरों में भी लागू होगा। इस कदम को ठाकरे परिवार की राजनीति में नई जान फूंकने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। गौरतलब है कि हाल ही में हुए BEST कर्मचारी क्रेडिट सोसाइटी चुनावों में दोनों दलों ने पहली बार साथ मिलकर रणनीतिक शुरुआत की थी, जिसे इस गठबंधन का ट्रायल माना गया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम मराठी अस्मिता और वोट बैंक को फिर से एकजुट करने का प्रयास है, साथ ही भाजपा और शिंदे गुट की शिवसेना को चुनौती देने की योजना भी। लंबे समय से अलग राह पर चल रहे ठाकरे बंधुओं का यह मेल न केवल परिवार की एकता का प्रतीक है, बल्कि महाराष्ट्र की शहरी राजनीति में भी बड़ा बदलाव ला सकता है। अब देखना यह होगा कि यह गठबंधन कितना सफल रहता है और आने वाले चुनावी समीकरणों को किस तरह प्रभावित करता है।
भाजपा ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। भाजपा नेताओं ने इस गठबंधन को राजनीतिक मजबूरी और अवसरवादी कदम करार दिया। भाजपा विधायक प्रवीण

 दारेकर ने कहा कि बीते 20 वर्षों में उद्धव ने अपने चचेरे भाई की कभी परवाह नहीं की और अब चुनाव के समय उन्हें याद आया है। मंत्री गिरीश महाजन ने भी इसे मराठी वोटरों को लुभाने की कोशिश बताया और कहा कि मराठी समाज ने हमेशा भाजपा को ही समर्थन दिया है। वहीं, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष चंद्रशेखर बावणकुळे ने इसे उद्धव ठाकरे की राजनीतिक निराशा का प्रतीक बताते हुए कहा कि भाजपा और महायुति ही महाराष्ट्र के विकास और स्थिरता का विकल्प हैं। नितेश राणे ने यहां तक कहा कि राज ठाकरे शायद उद्धव ठाकरे द्वारा दिए गए पुराने “दुख” को भूले नहीं होंगे और यह गठबंधन केवल अस्तित्व बचाने की कवायद है। दूसरी ओर, भाजपा ने ठाकरे बंधुओं की “मराठी अस्मिता” वाली राजनीति का मुकाबला करने के लिए खुद भी मराठी पहचान को केंद्र में रखकर रणनीति तैयार कर ली है। कुल मिलाकर, भाजपा ने इस गठबंधन को गंभीर खतरा मानने के बजाय इसे असफल प्रयोग बताया है और दावा किया है कि आगामी चुनावों में महायुति गठबंधन ही जनता का भरोसा जीतेगा।