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AIIMS देवघर के पहले दीक्षांत समारोह में राष्ट्रपति मुर्मू का संबोधन: समावेशी और संवेदनशील स्वास्थ्य सेवा का आह्वान

Published on 31 July 2025
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भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू ने आज (31 जुलाई, 2025) झारखंड के देवघर स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS), देवघर के पहले दीक्षांत समारोह की गरिमामयी उपस्थिति से शोभा बढ़ाई।

इस अवसर पर संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि भले ही AIIMS देवघर की स्थापना तृतीयक स्वास्थ्य सेवाओं पर केंद्रित होकर हुई हो, लेकिन इसे प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में भी सक्रिय योगदान देना चाहिए। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज की नींव प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल है। उन्होंने सुझाव दिया कि AIIMS देवघर के डॉक्टरों और छात्रों को शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और ग्रामीण सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों का दौरा कर स्थानीय लोगों को मदद और मार्गदर्शन देना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि डॉक्टरों को समावेशी स्वास्थ्य सेवा को अपने व्यक्तिगत जीवन का भी सिद्धांत बनाना चाहिए।

राष्ट्रपति ने स्नातक हो रहे छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि AIIMS से शिक्षा प्राप्त करना यह विश्वास दिलाता है कि वे अब कुशल डॉक्टर बन चुके हैं। उन्होंने कहा कि एक डॉक्टर को केवल कुशल और योग्य ही नहीं, बल्कि एक अच्छा इंसान भी होना चाहिए। उन्होंने बताया कि एक अच्छे डॉक्टर में तीव्र नैदानिक समझ के साथ-साथ संवेदनशील संवाद कौशल भी होना चाहिए। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि कुछ डॉक्टर ऐसे होते हैं, जिनसे परामर्श करने के बाद मरीज और उसके परिवार को मानसिक राहत मिलती है। उन्होंने डॉक्टरों से आग्रह किया कि वे अपनी चिकित्सा प्रक्रिया में भले ही पूरी तरह व्यावसायिक और वैज्ञानिक रहें, लेकिन अपने व्यवहार में मानवीय और सहानुभूतिपूर्ण बने रहें।

 

 

राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि सरकार राष्ट्रीय स्तर पर यह प्रयास कर रही है कि आम लोगों के स्वास्थ्य पर होने वाले "आउट-ऑफ-पॉकेट" खर्च का बोझ कम किया जाए। इस राष्ट्रीय प्रयास में AIIMS देवघर जैसे संस्थानों और वहाँ के डॉक्टरों की संस्थागत और व्यक्तिगत दोनों भूमिकाएं अहम हैं। उन्होंने AIIMS देवघर के सभी हितधारकों से अपील की कि वे स्वास्थ्य और चिकित्सा से जुड़े सतत विकास लक्ष्यों (Sustainable Development Goals) की सूची बनाएं और यह पता करें कि भारत और झारखंड उन लक्ष्यों को प्राप्त करने में किस स्थिति में हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि जिन लक्ष्यों की पूर्ति अभी बाकी है, AIIMS देवघर यह तय करे कि वह राज्य और देश स्तर पर उन्हें पूरा करने में कैसे योगदान दे सकता है।

राष्ट्रपति ने कहा कि हमारे देश ने स्वास्थ्य क्षेत्र में कई महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किए हैं और AIIMS जैसे संस्थानों की इसमें प्रमुख भूमिका है। AIIMS देवघर जैसे संस्थान, जिनकी स्थापना स्वास्थ्य सेवाओं में असमानता को समाप्त करने के लिए की गई है, अंधकार में उजाला फैलाने वाले दीपस्तंभ (beacons) के समान हैं। उन्हें न केवल विश्वस्तरीय विशेषज्ञ चिकित्सा सेवा सस्ती दरों पर उपलब्ध करानी है, बल्कि पूरे स्वास्थ्य तंत्र में सकारात्मक परिवर्तन के वाहक (change-agents) की भूमिका भी निभानी है।

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